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Hindi story । सुनो तो अपने दिल की। कहानी


Hindi story - सुनो तो अपने दिल की






Hindi Story                                                 Hindi Story
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Hindi story - सुनो तो अपने दिल की




एक बार की बात है कि एक विद्यार्थी था जिसका नाम था अमित वह पढ़ने में बहुत अच्छा होने के साथ-साथ एक अच्छा पेंटर भी था बचपन से ही उसकी पेंटिंग में रुचि थी वह बचपन से ही पेंटिंग बनाने में माहिर था क्योंकि वही उसकी पहली पसंद थी।


निचले स्तर की शिक्षा प्राप्त करने के बाद जब उसने कॉलेज ज्वाइन किया तो उन विषयों में भी पेंटिंग ही चुना जब उसकी पढ़ाई पूरी हुई तो कॉलेज के प्रिंसिपल के पास अपना सर्टिफिकेट लेने के लिए पहुंचा।


तो प्रिंसिपल ने उसको सर्टिफिकेट देते हुए कहा कि तुम एक बहुत ही अच्छे पेंटर हो तुम्हारी पेंटिंग का तो जवाब ही नहीं मुझे गर्व है कि तुमने हमारे काॅलेज से पढ़ाई की। इतना कहकर उन्होंने उसका सर्टिफिकेट उसको दे दिया और वह अपने घर की ओर चल दिया।



लेकिन रास्ते में ही उसके मन में ख्याल आने लगे कि प्रिंसिपल ने तो कह दिया कि मैं एक बहुत ही अच्छा पेंटर हूं लेकिन साबित कैसे करूं कि मैं सबसे अच्छा पेंटर हूं कौन साबित कर सकता है इसको कि मैं सबसे अच्छा पेंटर हूं , उसे खुद पर विश्वास नहीं हो रहा था।



 तभी उसके मन में एक विचार आया कि क्यों न एक पेंटिंग बनाई जाए और फिर लोगों से टेस्ट कराया जाएं तो उसने एक बहुत ही सुन्दर पेंटिंग बनाई और उसको चौराहे पर ले जाकर टांग दिया।



और उसने पेंटिंग के नीचे लिखा इस पेंटिंग में आप लोगों को जहां कहीं भी कमी या गलतियां दिखे वहां पर एक निशान लगा दीजिए ऐसा लिख कर उसने एक हफ्ते तक उसको छोड़ दिया।



जब आठवें दिन आया तो देखा कि उसकी पूरी की पूरी पेंटिंग निशानों से भरी पड़ी थी लोगों ने पूरी पेंटिंग में निशान लगा कर पेंटिंग खराब कर दिए थे वह अपनी पेंटिंग देखते ही हैरान हो गया , उसने तुरंत वह पेंटिंग उठाई और सीधा अपने प्रिंसिपल के पास पहुंचा और बोला,



कि सर आपने तो कहा था कि मैं बहुत ही अच्छा पेंटर हूं और मेरी पेंटिंग का जवाब नहीं, लेकिन यह क्या " यह देखिए तो लोगों ने क्या किया है " और पेंटिंग दिखाते हुए सारी बातें बताई तब प्रिंसपल ने कहा,



कि बेटा इस बार तुम एक और पेंटिंग बनाओं और मैं जैसा कहता हूं वैसा ही करना, और पेंटिंग बनाने के बाद उसके नीचे यह लिखना है कि आप लोगों को जहां कहीं भी गलतियां दिखे उसको सुधार दिजिए।



उसने ठीक वैसा ही किया और एक और पेंटिंग बनाई और पुनः उसी चौराहे पर ले जाकर टांग दिया और उसके नीचे यह लिखा कि इस पेंटिंग में जहां कहीं भी गलतियां दिखे उसको सुधार दीजिए और फिर वैसा ही एक हफ्ते तक छोड़ दिया।



फिर आठवें दिन गया और देखा कि उसकी पूरी की पूरी पेंटिंग जस की तस पड़ी थी किसी ने उसको हाथ भी नहीं लगाया था उसके बाद उसने वह पेंटिंग उठाई है और फिर प्रिंसपल के पास पहुंचा और सारी बात बताई।


तब प्रिंसपल ने कहा कि बेटा इस संसार में एक अच्छे आदमी की कमी निकालने वाले बहुत लोग हैं लेकिन उन कमियों को सुधारने वाले बहुत ही कम है  इसलिए लोगों की ना सुनो क्योंकि लोग हर एक चीज को अपने-अपने हिसाब से सोचते हैं



सीखने योग्य.....

दोस्तों आपको रास्ता भटकाने वाले लोग तो बहुत मिलेंगे लेकिन रास्ता दिखाने वाले लोग बहुत ही कम मिलते हैं अगर आप सही रास्ते पर हैं तो भी लोग आपको देखकर जलेंगे और सोचेंगे कि क्यों ना वह भी मेरी ही तरह गलत रास्ते पर जाए , और वहीं से लग जाएंगे आपके पीछे ताकि आप भी उसी गलत रास्ते पर चलें , जिस पर वह लोग पहले से ही खड़े हैं


दोस्तों हिमालय चढ़ने की तो सब सोचते हैं लेकिन कुछ ही चढ़ने आते हैं उनमें से भी कुछ लोग आधे रास्ते से लौट जाते हैं लेकिन वह लोग जो सामने मुश्किलें खड़ी देख अपना फैसला बदल लेते हैं और घर वापस लौट आएहैं और दूसरे वह लोग जो उन तमाम मुश्किलों के बावजूद उनका फैसला अटल रहता है और आगे बढ़ते हैं।
इतिहास गवाह है की वहीं लोग इतिहास बदलते हैं।




दोस्तों इस पूरी कहानी में आपको कहीं भी त्रुटियां दिखें तो अपना छोटा भाई समझकर क्षमा कीजिएगा क्योंकि गलती इंसान से ही होती है और गलतियां करने वाले ही एक दिन सही करता हैं।




✍️ by Pawan sir......





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