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Ignore mat karo

इग्नोर मत करो-Hindi Storyignore mat karo, hindi story

हिन्दी कहानियाॅ


दोस्तों-
एक जंगल में एक गाय और एक बैल रहा करते थे। दोनों में काफी घनिष्ठता थी और दोनों एक साथ, एक ही वक्त घास चरने जाया करते थे। कोई भी काम हो दोनों एक साथ ही करते थे।

cow and Ox
गाय और बैल की कहानी


लेकिन एक समय ऐसा आया की जिस जंगल में वह रहते थे, वह सूखने लगा था क्योंकि गर्मियों के दिन आ गए थे। नदी तालाब सब सुख रहे थे हरा भरा जंगल पूरा पतझड़ में बदल गया था। तब दोनों ने सोचा कि अब यहां पर हमारा गुजारा नहीं हो सकता, अब हमें यहां से कहीं और चल देना चाहिए।

दोनों ने आपस में विचार किया और चलने का फैसला किया, और अगली ही सुबह दोनों उस जंगल से चल दिए। चलते-चलते बहुत दूर आ गए थे और अब शाम हो गई थी और फिर अंधेरा छा गया। और अंधेरे में भी थोड़ी दूर चले थे और कुछ दूर आगे जाने के बाद उनको थकान भी महसूस होने लगी थी। और आगे का रास्ता भी मालूम नहीं था।

इसलिए उन दोनों ने सोचा कि चलो यहां पर थोड़ी देर आराम कर लेते हैं। तो वह वहीं बैठ कर आराम करने लगे दोनों काफी थके हुए थे, इसी वजह से उन्हें नींद आ गई अभी पूरी रात बाकी थी दोनों ने सोचा चलो यहीं पर सो जाते हैं, और वही पर सो गए।

अगली सुबह जैसे ही दोनों ने आंखें खोली तो देखा कि उनके अगल-बगल पूरा का पूरा हरा भरा मैदान था। चारों तरफ देखा तो वह दोनों एक नदी के बीच में टापू पर थे। चारों तरफ हरी-भरी घास देखकर गाय का मन लालच उठा।

लेकिन बैल ने कहा कि हमें यहां नहीं रुकना चाहिए हमें यहां से चलना चाहिए लेकिन गाय तो हरी भरी घास देखकर उन पर लुभा चुकी थी। उसका मन आनंदित हो रहा था, लेकिन बैल का मन ऐसा नहीं था उसने सोचा कि हमें लालच में नहीं पड़ना चाहिए और यहां से चल देना चाहिए। कहीं व्यवस्थित ठिकाना देखकर ही ठहरना चाहिए।

जबकि नदी सूख गई थी और टापू पर घास भी उग आए थे, लेकिन फिर भी बैल को अनहोनी की आशंका हो रही थी तो उसने फैसला किया कि हमें चलना चाहिए लेकिन गाय ने मना कर दिया बैल गाय को अपना परम साथी मानता था इसी वजह से उसे उसकी फिक्र होने लगी।

लेकिन गाय तो जैसे आकाश में उड़ रही हो हरे-भरे घास का मैदान चारों तरफ हरियाली ही हरियाली, यहां खाओ वहां खाओ, इधर कूदो उधर कूदो, गाय जैसे मन ही मन उछल कूद कर रही थी। उसने पहली बार इतनी खूबसूरत घास देखी थी लेकिन बैल के मन में आशंका होने लगी थी।

उसने सोचा कि यह हरी-भरी घास कुछ ऐसी ही है जैसे तूफान आने के पहले मौसम में सन्नाटा रहता है। उसे तो शंका होने लगी थी लेकिन फिर भी गाय ने नहीं माना तो बैल नहीं अकेले चलने का फैसला किया और चलते-चलते काफी दूर से जंगल में चले गया।

लेकिन गाय ने वहीं पर खूब भरपेट घास खाया और आराम करते-करते वहीं पर सो गई फिर अगले दिन उठी और खूब घास खाया और ऐसे ही आराम करते-करते वहीं पर सो जाती ऐसा कई दिनों तक चलता रहा। अब ऐसे कुछ ही दिन बीते थे कि बरसात का मौसम आ गया और बारिश होने लगी।

पहले तो गाय को सिर्फ हरी भरी घास ही मिला करती थी लेकिन अब तो उसे पीने के लिए भरपूर पानी भी मिलने लगा अब तो गाय मानों स्वर्ग में आ गई हो कुछ ही समय बाद जोरदार बारिश होने लगी और नदी भर आई हालांकि गाय एक टापू पर रहती थी। इसलिए अभी तक तो उस टापू पर पानी नहीं पहुंचा था।

लेकिन नदी का जल धीरे-धीरे बढ़ ही रहा था और एक समय ऐसा आया कि वह टापू भी डूबने लगा। अब गाय को समझ नहीं आ रहा था कि क्या करें। उधर दूर तक दोनों तरफ नदी ही थी, पानी ही पानी दिख रहा था गाय ने सोचा कि क्या किया जाए। अब उसको बैल की याद आने लगी क्योंकि पानी अब उसके घुटनों के ऊपर हो रहा था।

और धीरे-धीरे देखते ही देखते गाय डूबने लगी और एक वक्त ऐसा आया की गाय का सिर्फ सर और थोड़ी सी पीठ दिख रही थी। बाकी का पूरा बदन पानी में डूब चुका था। और ऊपर उड़ रहे चील-कौवों को लगा कि कोई जानवर मरा पड़ा है तो बहुत सारे चील को हुए वहां पर इकट्ठे हो गये।

और उसकी पीठ और सर पर चोंच मारने लगे अब गाय को बहुत दर्द हो रहा था चिल-कौवों ने उसकी पूरी पीठ नोच डाली थी और वह करती भी क्या भागना तो दूर की बात हिलना मुश्किल हो रहा था क्योंकि चारों तरफ पानी ही पानी था आगे भी पानी पीछे भी पानी बहने का खतरा मंडराने लगा लेकिन चील कौवा नहीं नोचना बंद नहीं किया देखते ही देखते गाय के पीठ से खून की धारा बहने लगी।

लेकिन गाय को उसका दर्द नहीं हो रहा था उसे तो अपने घाव से ज्यादा बैल की बातों को याद करके दर्द हो रहा था कि उसने बैल की बात क्यों नहीं मानी वह तो उसका अच्छा साथी हुआ करता था फिर भी उसने उसकी बात नहीं मानी ऐसा सोचकर मन ही मन सौ बार मर रही थी।ऊपर से चील-कौवे भी नोच रहे थे। 

नदी का जलस्तर और बढ़ने पर गाय का दम घुटने लगा और अंततः गाय का पैर जमीन से उठ गया और गाय बह गई आगे चारों तरफ पानी ही पानी था गाय तैर भी नहीं सकती थी क्योंकि एक तो वह पहले से ही जख्मी थी, और पानी कुछ ही दूर नहीं बल्कि कोसों दूर तक पानी ही पानी था। इसलिए गाय तो डूब गई। 


हमें सीख क्या मिलीं


लेकिन डूबते-डूबते हम जैसे लोगों को यह शिक्षा दे गई कि अपने साथी की बातों को इग्नोर ना करें वह हमारे भलाई के लिए ही कुछ कहते हैं उनकी बातों का बुरा नहीं मानना चाहिए अपने मन ही मन में यह सोचे कि यदि वह सच बोल रहे हैं और उनकी बातें अगर अच्छी है तो उनका पालन जरूर करें।

उनकी बातों पर मनन करें क्योंकि ऐसा ना करके हमें भी एक न एक दिन उसी गाय की भांति पछताना पड़ सकता है, जो गाय बैल की बात न मान कर नदी में बह गई इसीलिए दोस्तों अपनी साथी को हमेशा सही राह दिखाएं और यदि वह आपको कुछ कह रहा है तो उसकी बातों को ध्यान पूर्वक सुने और अच्छी लगे तो उनका पालन जरूर करें।

कभी-कभी ऐसा होता है कि जब आप गलतियां करते हैं तो आपके दोस्त आपके साथी, आपको अच्छे राह पर लाने के लिए कुछ अच्छी बातें बताते हैं, लेकिन वह बातें आपको अच्छी नहीं लगती और अंत में आप कोई ना कोई गलती कर बैठते हैं। 

और कभी-कभी आपके साथी कुछ गलत करते हैं तो आप उनको समझाते हैं और आपकी बातों को न मानते हुए वे लोग कोई ना कोई गलती कर बैठते हैं इसलिए हमें एक दूसरे की बात ध्यान पूर्वक सुननी चाहिए क्या पता किसकी वाणी से कौन सा अमृत कब निकल जाए और हमारा जीवन बन जाए, क्योंकि छोटे मुंह से ही बड़ी बात निकलती है दोस्तों।

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